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जानिए THUGS of HINDOSTAN की पूरी कहानी

दिवाली पर आने वाली फिल्म "ठग्स ऑफ हिंदुस्तान" का हम सभी को बेसब्री से इंतजार है इस फिल्म की कहानी 1839 में लिखी हुई एक किताब कन्फेशन ऑफ ठग्स पर आधारित है। आज इस आर्टिकल में मैं आपको ठगों के असली कहानी के बारे में बताऊंगा।
जानिए THUGS of HINDOSTAN की पूरी कहानी
ठग एक हत्यारी जनजाति को नाम दिया गया जो कि अपना वजूद मां काली के पसीने से जुड़ा हुआ बताते हैं। ठगो में कहे जाने वाले एक लोककथा के अनुसार जब मां काली रक्तबीज नामक राक्षस से युद्ध कर रही थी तब उस राक्षस रक्तबीज के हर एक खून के बूंद से एक नया हूबहू राक्षस का रूप बन जाता था। यानी जितना ज्यादा राक्षस का खून बहता था उतने और राक्षस पैदा हो जाते थे। इससे मां काली की कठिनाइयां बढ़ने लगी। तो इसका समाधान करने के लिए मां काली ने तब अपने पसीने से दो इंसानो को बनाया जिसको उन्होंने रुमाल जैसा एक कपड़ा दिया जिसकी मदद से वह राक्षस का गला घोट के हत्या कर सके।

ठग उन्हीं दो इंसानों को अपना पूर्वज मानते थे और इसी को अपना धर्म मान लिया था। दिल्ली से जबलपुर के रास्तों के आसपास ठगों का खौफ बहुत ज्यादा था उनकी बातें हर जगह हुआ करती थी जिसका वजह था की वह बिना एक बूंद खून बहाए लोगों को मार देते थे। उनके मारने का तरीका उनके पूर्वजों जैसा था। वह एक रुमाल से किसी इंसान की गला घोट देते थे और उस इंसान को तब तक नहीं छोड़ते थे जब तक वह दम ना तोड़ दे और उसके बाद वह उसका सारा सामान लूट लेते थे। वे उन हत्याओं को मां काली का दिया हुआ बलिदान मानते थे। मरने के बाद उनके घुटने और हड्डियों को तोड़कर उसी के शरीर में बांध देते थे ताकि वह छोटी सी जगह में दफन हो सके। वे सभी काम कितनी सफाई से कैसे करते थे कि किसी को पता नहीं लगता था कि इंसान गायब कहां हुआ। उनके हिसाब से वह मां काली को बलिदान दे रहे थे पर वे उनका काम बन गया था और वह धर्म के नाम पर अपना पेट भरते थे।

ब्रिटिश राज्य के समय जब कई राजाओं ने अपना सर अंग्रेजों के आगे झुका दिया था तब ठग्स डटे रहे और अंग्रेजो की हत्या करनी शुरू कर दी। कई बार तो वे अंग्रेजी सेनाओं के कई जवानों को वे एक ही बार में साफ कर दिया करते थे। वे ठग्स और फांसिगर्स नाम से जानने जाने लगे। 17 वी सदी में कई अंग्रेजों की टोलियां रातों रात गायब हो जाया करती थी सिर्फ इन ठगो के कारण। ठगो का समूह 500 वर्षों तक चला। ठगो ने एक वर्ष में ही 40000 लोगों को मारा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी लिखा गया है।
वैसे तो ठग बहुत ही बेरहम थे पर वे बच्चों को नहीं मारते थे बल्कि वे उन्हें अपने साथ शामिल कर लेते थे जो कि आगे चलकर ठग ही बनते थे। 20 वीं सदी में जब अंग्रेजों की हत्या काफी ज्यादा बढ़ गई तब अंग्रेजों को पता लगा कि इन हत्याओं के पीछे ठगों का हाथ है पता होने के बाद भी वह उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाए क्योंकि उनका वजूद का सबूत ही नहीं मिलता था। ठग बैहराम जमादार जो कि ब्रिटिश राज्य के समय ठगो का लीडर हुआ करता था उसने अकेले ही 931 हत्याएं करी और वे आज तक के सबसे खतरनाक सीरियल किलर में शामिल है। ठग बैहराम जमादार की वजह से अंग्रेजों की समस्या बहुत ज्यादा बढ़ गई। अंग्रेजों ने विलियम हेनरी स्लीमन को ठगों को पकड़ने के लिए चुना, विलियम स्लीमन ने इस काम को अपने जिंदगी का लक्ष्य बना लिया। स्लीमन ने कई ऐसे ऑपरेशन चलाया है जिससे उसने ठगों को पकड़ने लगा इसी बीच कई ठगों ने अपने समूह से गद्दारी की और उसने अंग्रेजों को ठगों का ठिकाना बताना शुरू कर दिया।

1839 के बाद करीब 1400 ठगो को फांसी दी गई इसके बाद ठगो के सरदार है बैहराम जमादार को भी पकड़ लिया गया और पेड़ से लटका कर फांसी दे दी गई। बैहराम के मृत्यु के बाद हत्याएं कम होने लगी और ठगो का समूह खत्म होने लगा और समय के साथ साथ ठग का एक इतिहास बनकर रह गया। इसमें ना ब्रिटिश शासक अच्छे थे और ना ही ठग क्योंकि दोनों से आम जनता को भारी नुकसान होता था।

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