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अगर चांद गायब हो जाए तो क्या होगा

क्या होगा जब चांद नहीं होगा यह जानने से पहले आइए कुछ बेसिक जानकारी के बारे में जान लेते हैं।
अगर चांद गायब हो जाए तो क्या होगा
अगर चांद गायब हो जाए तो क्या होगा

चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह जिसका जन्म आज से लगभग 4.5 अरब वर्ष पूर्व पृथ्वी और थिया ग्रह के भीषण टकराव के बाद बचे हुए अवशेषों के मलबे से बना था। चंद्रमा हमारे सौरमंडल का पांचवा विशाल प्राकृतिक उपग्रह।

पृथ्वी के मध्य से चंद्रमा की एवरेज दूरी 384,403km है पृथ्वी का द्रव्यमान चंद्रमा की तुलना में लगभग 81 गुना है और चंद्रमा का व्यास पृथ्वी के व्यास का लगभग एक चौथाई है इसलिए पृथ्वी की तुलना में चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण बल छठा हिस्सा ही रह जाता है। यदि कोई मनुष्य पृथ्वी की सतह पर 1 मीटर ऊंचा उछल सकता है तो वही मनुष्य है चंद्रमा की सतह पर 6 मीटर ऊंचा उछल सकेगा। जिस तरह पृथ्वी को सूर्य की परिक्रमा करने में 365 दिन लगते हैं उसी तरह चंद्रमा को पृथ्वी की परिक्रमा करने में 27.3 दिन लगते हैं। और अपने अक्ष पर भी एक चक्कर पूरा करने में 27.3 दिन लगते हैं यही कारण है की चंद्रमा का एक हिस्सा या फेस पृथ्वी की तरफ रहता है। अगर चंद्रमा पर खड़े होकर हम पृथ्वी को देखें तो पृथ्वी हमें साफ-साफ अपने अक्ष पर घूमती हुई नजर आएगी लेकिन आसमान में उसकी स्थिति सदैव स्थित रहेगी अर्थात पृथ्वी को कई वर्षों तक निहारते रहो फिर भी वह अपनी जगह से टस से मस नहीं होगी।

चंद्रमा के कारण पृथ्वी के अक्ष गति का धीमा पड़ना आज भी जारी है। हर 100 वर्षो में वह 0.0016sec यानी हर पचास हजार वर्षो में 1 सेकेंड की दर से धीमी पड रही है।
पृथ्वी की गति धीमी पड़ रही है और चंद्रमा की गति बढ़ रही है अक्ष गति बढ़ने से चंद्रमा पृथ्वी से हर साल 3.8cm दूर होता जा रहा है और अगले 50 साल तक ऐसा ही होता रहेगा। ऐसा होने पर चांद पृथ्वी की एक परिक्रमा करने में 47 दिन लगाएगा।

यह तो थी चंद्रमा के बारे में कुछ बेसिक जानकारी दोस्तों अगर चांद ना हो तो हमारी धरती पर क्या असर पड़ेगा।
जिस तरह पृथ्वी पर जीवन के लिए सूर्य बहुत महत्वपूर्ण है उसी तरह चांद के बिना भी जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है।

दिन और रात पर असर: चंद्रमा के गायब होते हैं उसका गुरुत्वाकर्षण समाप्त हो जाएगा जिसके कारण पृथ्वी की घूमने की गति इतनी तेज हो जाएगी यह अपने अक्ष पर एक चक्कर पूरा करने में 24 घंटे की जगह 8 से 9 घंटे में ही पूरा कर लेगी और इस वजह से सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा को पृथ्वी निरीक्षण (observe) नहीं कर पाएगी जिससे पृथ्वी का तापमान माइनस में चला जाएगा। और अगर पृथ्वी का तापमान माइनस में चला जाएगा तो धरती पर मौजूद जल लिक्विड फॉर्म में ना रहकर बर्फ में बदल जाएगा और ऐसी स्थिति में पृथ्वी पर जीवन समाप्त हो जाएगा।
हम जानते हैं की चांद और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी पर लगता है जिसके कारण वह अपनी और खींचाव पैदा करते हैं ठोस जमीन ऊपर नहीं उठती लेकिन यह समुंदर पर असर दिखाता है जिसे हम ज्वार भाटा या बड़ी बड़ी लहरों के रूप में देखते हैं लेकिन सूर्य की तुलना में चांद पृथ्वी के ज्यादा करीब है जिससे पृथ्वी पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल चंद्रमा द्वारा ज्यादा होता है।

आइए इसे और अच्छे से समझे
The Mysterious knowledge
चंद्रमा जल को एक कुंबदनुमा आकार में खींचता है और दूसरी तरफ सूर्य भी यही करता है लेकिन छोटे आकार में, अगर चंद्रमा अपने जगह से अचानक गायब हो जाए तो सबसे पहले समुंदर का इतना उठा हुआ या गुंबद नुमा जल समुन्द्र तल के बराबर आ जाएगा जिससे भयानक सुनामी आएगी और पृथ्वी पर जन जीवन बहुत प्रभावित होगा लेकिन पूरी तरह से समाप्त नहीं होगा क्योंकि धीरे-धीरे समुद्र की लहरें थम जाएंगी। पृथ्वी पर जीवन पहले जैसा कभी नहीं रह पाएगा।
हमारी धरती पृथ्वी अपने अक्ष पर 23.5° झुकी हुई है और यह झुकाव चांद ही पैदा करता है इसी वजह से मौसम बदलते हैं। लेकिन अगर चांद नहीं होगा तो पृथ्वी पर सूर्य के अलावा बड़े ग्रहों का गुरुत्वाकर्षण बल असर दिखाएगा किस से पृथ्वी के झुकाव में अस्थिरता आ जाएगी जैसे मंगल ग्रह पर होता है। और जिससे मौसम तेजी से बदलने लगेंगे और तापमान एक पेंडुलम घड़ी की तरह डुलना शुरू हो जाएगा जो दोपहर में 80 डिग्री और सुबह के समय -8 डिग्री तक जा सकता है।

आइए अब जानते हैं चांद के बारे में कुछ रोचक तथ्य: चांद पर लगभग 181400 किलो का मानव निर्मित मलवा पड़ा हुआ है जिसमें 70 से अधिक अंतरिक्ष यान और दुर्घटनाग्रस्त कृतिम उपग्रह भी शामिल है। पृथ्वी के विपरीत चंद्रमा का ना अपना कोई वायुमंडल है और ना ही अपना चुंबकीय क्षेत्र। चंद्रमा पर हर एक चीज का वजन पृथ्वी के वजन का छठा हिस्सा ही रह जाता है यानी की पृथ्वी पर जो भी चीज 60 किलो भारी है वह चंद्रमा पर सिर्फ 10 किलो भारी ही रह जाएगा। किसी भी तरह के वायुमंडल ना होने का मतलब है कि सोलर स्ट्रोम और उल्का पिंड का आने का खतरा लगातार बना रहता है यहां तापमान में भारी उतार-चढ़ाव होता रहता है और आसमान हमेशा काला दिखाई देता है।Neil Armstrong and Buzz Aldrin ने चंद्रमा पर कई वस्तुओं को छोड़ दिया इन वस्तुओं में यूरी गागरिन का अंतरिक्ष यात्री पदक यानी कॉस्मोनॉट मेडल भी शामिल था। अपोलो11 और 17 से मिशन से लाए गए चट्टानों में से 160 टुकड़े आज गायब हैं। तब चंद्रमा के 0.2 ग्राम धूल की कीमत 442500 डॉलर थे।
पिज्जा हट लेजर की मदद से अपना लोगो चंद्रमा पर बनाने का सोचा था पर जब उसे पता चला कि लोगों का आकार USA के Texas शहर जितना बड़ा बनाना पड़ेगा तो इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया।

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